Saturday, August 29, 2015

गंजापन

गंजेपन की बीमारी किसी एक स्थान में भी हो सकती है या साधारण तौर पर सारे शरीर में भी । ज्यादातर यह बीमारी सर में गोल घेरे वाले स्थान में देखी जाती है या दाढ़ी में भी गोल घेरे में पाई जाती है । 

गंजेपन की बहुत बढ़ी हुई बुरी स्थिति में रोगियों के दाढ़ी, पलकों, भौहे, बगल और जाँघो आदि के बाल भी नष्ट हो जाते है । आयुर्वेद में इस रोग को 'खालित्य' के नाम से जाना जाता है । 

वैसे तो गंजापन से किसी भी प्रकार का शारीरिक कष्ट और दर्द नही होता, परन्तु व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हो जाता है । रोगी में एक प्रकार की हीन भावना घर कर जाती है । इसका मुख्य कारण यह है कि गंजेपन के कारण रोगी की सुंदरता पर बुरा असर पड़ता है अर्थात इस रोग के कारण रोगी कुरूप लगने लगता है ।  

उपचार - इस  रोग की चिकित्सा के लिए भृंगराज या भांगरा नामक औषधि द्रव्य सबसे उत्तम माना गया है । प्रायः चिकित्सक इस द्रव्य से तैयार किये गए महाभृंगराज तेल अथवा नीली भृंगादि तेल लगाने की सलाह देते है । 

नहाने से करीब एक घंटा पहले सिर की त्वचा पर इस तेल से धीरे-धीरे मालिश करनी होती है । इस मालिश से सिर में उगे हुए सभी कमजोर बाल गिर जाते है । परन्तु इससे डरना नही चाहिए ।  इस तेल की मालिश लगातार छः महीनों तक करते रहना चाहिए ।  तेल लगाने के साथ-साथ रोगी को भांगरे का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में खाने को देना चाहिए । यह चूर्ण शहद में मिलाकर दिन में दो बार खाली पेट ही देना चाहिए । 

इस रोग में हाथी दाँत का प्रयोग भी बहुत लोकप्रिय है । हाथी दाँत के छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर भस्म तैयार की जाती है ।   इस भस्म को घी अथवा शहद के साथ रगड़ कर प्रतिदिन गंजे स्थान पर लगाना चाहिए । यदि यह भस्म रात के समय लगाईं जाये तो अधिक अच्छा रहता है क्योंकि इससे औषधि रात भर सिर की त्वचा के साथ लगी रहती है और अधिक प्रभावकारी सिद्ध होती है । 

यदि छोटी आयु में ही गंजापन हो तो ये दवाइयाँ बहुत अच्छा काम करती है । इनमे अस्वकंचुक रस नामक औषधि का प्रयोग करना चाहिए । मूल रूप से यह दस्त लाने वाली औषधि है । इसकी गोलियों को पीसकर शहद के साथ मिलाया जाता है । यह औषधि लगाने से शुरू में त्वचा कुछ लाल सी हो जाती है तथा जलन व खारिश भी हो सकती है । परन्तु धीरे धीरे बाल उगने लगते है । 

बाल गिरने का सबसे मुख्य कारण कमजोरी है । अतः रोगी को पोषक पदार्थो का सेवन करना चाहिए । घी, मक्खन, दूध, माँस, मछली, तथा इसी प्रकार के अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य-पदार्थो का सेवन उचित रहता है । यह ध्यान रखना चाहिए कि लीवर पर ज्यादा बोझ ना पड़े । इसलिए रोगी को तले हुए खाद्य-पदार्थो को बिल्कुल नही खाना चाहिए । 

              किसी  भी तरह कि स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह के लिए आप कमेंट करके पूछ सकते है ।  

Thursday, August 27, 2015

झड़ते बालों का ईलाज

बालों की सुरक्षा 


बालों के झड़ने या टूटने पर सिर में निम्बू के रस में दो गुना नारियल का तेल मिलाकर उंगलियो के अग्रिम पोरों से आहिस्ता - आहिस्ता केशों की जड़ो में मालिश करने से आपके केश ( बाल ) झड़ने बंद हो जायेंगे । साथ  ही बाल मुलायम और सिकरी मुक्त हो जायेंगे तथा बालो से सम्बंधित अन्य सभी रोग भी दूर हो जायेंगे ।

केशो का सौंदर्य 

शिकाकाई और सूखा आँवला प्रत्येक 25 - 25 ग्राम लें । थोड़ा कूटकर टुकड़े कर लें । रात को इन्हे 500 ग्राम पानी में डाल कर भिगो दे । प्रातः इस पानी को मसलकर कपडे से छान लें और सिर पर मले । दस - बीस मिनट बाद स्नान कर ले । इसी प्रकार शिकाकाई का तेल लगाने से केश लम्बे, घने, रेशम की तरह मुलायम और चमकदार हो जाते है । 


बालों का असमय सफ़ेद होना 

एक चम्मच भर आँवला चूर्ण दो घूँट पानी के योग से सोते समय अंतिम वस्तु के रूप में ले । असमय बाल सफ़ेद होने और चेहरे की कान्ति नष्ट हो जाये तो ये औषधि जादू का सा असर करती है । साथ ही स्वर को मधुर और शुद्ध बनाती है तथा गले की घर-घराहट भी इससे ठीक हो जाती है । 


सिर में रूसी 

नारियल का तेल 100 ग्राम, कपूर 4 ग्राम दोनों को मिलाकर शीशी में रख ले । एक दिन में दो बार केश सूख जाने पर लगाये ।  






Wednesday, August 26, 2015

मोटापा कम करने का उपाय

मोटापा कम करने का उपाय 




एक पाव पानी उबालकर ठण्डा  करे। जब पानी हल्का गुनगुना रह जाए तब उसमे पन्द्रह ग्राम शहद मिलाकर शरबत के समान पीने से मोटापा दूर हो जाता है । 

शरीर में चाहे जैसी भी चर्बी बढ़ गई हो, घटकर शरीर सुडौल बन जाता है । पेट के समस्त रोग दूर होकर जठराग्नि तीव्र बानी रहती है । खाली पेट प्रातः तीन महीने तक इसका सेवन करे । 

साथ ही मोटापा घटाने में सहायक योगासन और कसरत क्रियाए नित्य प्रातः करे । आसनों के अतिरिक्त नौली क्रिया भी मोटापा कम करने में सहायक है । दिन में केवल एक बार हल्का भोजन करें । 

हरी सब्जियों का सेवन विशेष रूप से करे । सांयकाल केवल फल खाये । भोजन के बाद पानी न पीये । चाय, कॉफी चर्बी बढ़ाने वाले और मीठे पदार्थो का सेवन न के बराबर करे । जहाँ शहद के साथ निम्बू पानी के साथ मोटापा घटाता है, वहाँ केवल निम्बू पानी से मोटापा घटता है । दोनों समय भोजन के तत्काल बाद एक गिलास उबलता हुआ गरम पानी पी लें और जितना गरम पिया जा सके, चाय की भाती छोटे छोटे घूँट भरें । 


इस प्रकार खाने के तत्काल बाद गरम पानी के लगातार सेवन से मोटापा घटकर शरीर संतुलित हो जाता है । मोटापे के अलावा गैस, कब्ज़, आँतो में सूजन, कलाइटिस, कृमि आदि रोग अमोबाइसिंस भी दूर हो जाते है ।